DHANBAD धनबाद: धनबाद के केंदुआडीह में हो रही जहरीले गैस रिसाव की जांच करने रविवार को रांची से एनडीआरएफ की टीम मौके पर पहुंची हैं। जांच के दौरान एनडीआरएफ को केंदुआडीह के नया धौड़ा में कार्बन मोनोऑक्साइड की मात्रा 1680 पीपीए मिला, जिसे देख टीम दंग रह गई।
केंदुआडीह गैस रिसाव क्षेत्र का मुआयना करने रांची से एनडीआरएफ की टीम धनबाद पहुंच चुकी है। टीम केंदुआडीह थाना में कैंप कर रही है। एनडीआरएफ की 32 टीम गैस रिसाव वाले क्षेत्र का मुआयना कर ड्रैगन मल्टी गैस डिटेक्टर से गैस की मात्रा का डेटा कलेक्ट कर रही है। वहीं, सिंफर, डीजीएमएस, सीएमपीडीआईएल और बीसीसीएल की रेसक्यू टीम भी लगातार क्षेत्र में गैस रिसाव की जाँच कर रही है।
गैस रिसाव की जांच कर रहे एनडीआरएफ की टीम को केंदुआडीह के नया धौड़ा में डरा देने वाले नतीजे मिले हैं। एनडीआरएफ टीम का नेतृत्व कर रहे सहायक कमांडेंट विनय कुमार ने बताया कि क्षेत्र के अलग – अलग हिस्सों में गैस की मात्रा अलग- अलग मिला है, लेकिन नया धौड़ा में सबसे अधिक 1680 पीपीए कार्बन मोनोऑक्साइड पाया गया है, जो डराने वाले हैं। उन्होंने बताया कि यह गैस इंसान के शरीर में सांस के साथ होमोग्लोबिन में मिल जाती है, जिससे लंग्स को ऑक्सीजन नही मिल पाता और इंसान की मौत हो जाती है।
उन्होंने बताया कि एनडीआरएफ की टीम क्षेत्र में कार्बन मोनोऑक्साइड की मात्रा की लगातार मॉनिटरिंग कर रही है, जहाँ भी गैस रिसाव होते पाया जा रहा है, वहाँ मार्किंग भी की जा रही है। वहीं, उन्होंने जिस क्षेत्र में जहरीले गैस की मात्रा अधिक है, वहां के लोगों से सतर्क रहने की अपील की।
वहीं, जांच के दौरान ही एक महिला की अचानक तबियत बिगड़ गई। जिसके बाद उस महिला को तत्काल अस्पताल भेज दिया गया। मौके पर मौजूद पुटकी पीबी एरिया के नए जीएम जेके मेहता ने बताया कि एक दो स्थानों पर गैस की मात्रा अभी भी अधिक है, जोकि खतरे की घंटी है। उन्होंने बताया आपात स्थिति में लोगों को चिकित्सा सेवा उपलब्ध कराने के लिए सेन्ट्रल हॉस्पिटल में 30 बेड का अलग से व्यवस्था की गई है, जहां मरीजों को समुचित इलाज की मिल सकेगा। इसके साथ ही कुसतौर सामुदायिक स्वास्थ्य केंद्र और मुनीडीह में भी बनाए गए राहत शिविर में चिकित्सा व्यवस्था के साथ लोगों के रहने की व्यवस्था है।
उन्होंने बताया कि पुर्नावास के लिए लोगों को बेलगड़िया और करमा टांड का भ्रमण भी कराया जा रहा है और अबतक 110 लोग भ्रमण कर चुके हैं और सभी वहाँ जाकर अपना जीवन यापन करने के लिए इच्छुक भी हैं।
वहीं दूसरी तरफ स्थानीय जनता और जनप्रतिनिधि विभागीय कार्रवाई से संतुष्ट नहीं दिख रहे हैं। लोगों की मांग है कि लोगों को विस्थापित करने के बजाय गैस रिसाव के कारणों का पता लगाया जाए और गैस रिसाव को बंद करने की व्यवस्था की जाए।







