Dhanbad:अंतर्राष्ट्रीय मातृभाषा दिवस के अवसर पर भारत की प्राचीन भाषा भोजपुरी पर राष्ट्रीय भोजपुरिया संस्था रसबुनिया के तत्वावधान मे मातृभाषा दिवस के अवसर पर भोजपुरी मातृभाषा पर राष्ट्रीय काव्य गोष्ठी का आयोजन किया गया। जिसकी अध्यक्षता वरिष्ठ सेवा निवृत प्रधानाचार्य डॉ. ओझा बक्सर- बिहार ने किया। इस अवसर बतौर मुख्य अतिथि प्रोफेसर डॉ. शैलेश सिंह शौर्य बलिया – उत्तर प्रदेश, कवि राघव पांडेय गोपालगंज-बिहार, संस्था के राष्ट्रीय संस्थापक पं. राजेश ओझा वाराणसी-उत्तर प्रदेश, विशिष्ट अतिथि वरिष्ठ भोजपुरी साहित्यकारा प्रमिला, तिवारी, रिंकू दुबे वैष्णवी, सुमन तिवारी,चाची, सुधा मिश्रा, पांडेय सरिता सहित कई कवि कवियों ने भोजपुरी भाषा में अपनी प्रस्तुति से मातृभाषा भोजपुरी भाषा का सम्मान कर अंतर्राष्ट्रीय दिवस को सार्थक बनाया।
मुख्य अतिथि प्रोफेसर डॉ. शैलेश सिंह शौर्य ने अपने उद्बोधन मे कहा कि जिस भाषा का राजा विक्रमादित्य व राजा भोज के कालखंड का इतिहास रहा है, आश्चर्य है वह भाषा फिजी मे संसदीय भाषा है, नेपाल की संसदीय भाषा है जबकि भारत में यह मातृभाषा आज भी उपेक्षित है और यह भाषा को संवैधानिक मान्यता तक नहीं है। कार्यक्रम का संचालन वरिष्ठ भोजपुरी साहित्य सृजक संजय सिंह चंदन ने किया। सभी कवियों ने मातृ भाषा भोजपुरी पर अपनी लोकप्रिय प्रस्तुति से काव्य गोष्ठी को ऊँचाई दी ।







