DHANBAD: जयराम महतो प्रकरण को लेकर चली आ रही लुकाछिपी का खेल अभी भी जारी है। पुलिस के सामने से जयराम महतो फरार होने की खबर आई थी। अब नामांकन पर्चे में हस्ताक्षर पर संदेह के बाद निर्वाची पदाधिकारी ने 7 मई को पेश होने का आदेश दिया है। अब देखने वाली बात यह होगी कि उस दिन जयराम महतो पेश होते है या नही। पुलिस भी इस बार गिरफ्तारी को लेकर सजग रहेगी।

आप को बताते चले कि गिरिडीह लोकसभा सीट के निर्दलीय प्रत्याशी जयराम महतो बुधवार को नाटकीय ढंग से पुलिस सुरक्षा के बीच से निकल गए थे। नामांकन के दौरान जयराम महतो की गिरफ्तारी की बात मीडिया में आई। लेकिन पुलिस देखती रह गई और वे सभा करने के बाद पुलिस को चकमा देकर आराम से निकल गए। इस मामले में पुलिस ने जयराम के खिलाफ पुलिस हिरासत में फरार होने का केस दर्ज किया है। वहीं अब निर्वाची पदाधिकारी की ओर से भी जयराम महतो को अलग से नोटिस जारी कर स्क्रूटनी के दिन 7 मई को पेश होने का आदेश दिया है।

जयराम महतो बुधवार 1 मई को बोकारो पहुंचे थे। वहां पुलिस ने उन्हें गिरफ्तारी की जानकारी दी। लेकिन समर्थकों ने नारेबाजी शुरू कर दी। समर्थकों के उग्र होने के बाद पुलिस ने नामांकन और सभा करने का आदेश दिया। कहा-शाम पांच बजे गिरफ्तारी होगी। जिसके बार जयराम महतो ने बोकारो के चास स्थित लबुडीह मैदान में सभा की। लेकिन सभा करने के बाद जयराम महतो फरार हो गए और पुलिस हाथ मलती रह गई। लेकिन इस बार पुलिस कोई भी मौका हाथ से जाने देना नहीं चाहती है। अब देखना है की 7 मई को जयराम महतो निर्वाची पदाधिकारी के समक्ष पेश होते है या उनका नामांकन रद्द होता है। वहीं पेश होने के बाद एक बार फिर क्या पुलिस उन्हें गिरफ्तार करने में सफलता हासिल करती है या फिर वह पुलिस को चकमा देकर फरार होने में सफल रहेंगे।

जयराम महतो झारखंड भाषा खतियान संघर्ष समिति (जेबीकेएसएस) के अध्यक्ष है। जयराम महतो राज्य में पिछले दो-तीन वर्षों से युवाओं को रोजगार, स्थानीयता और भाषा समेत अन्य मुद्दों को लेकर आंदोलन कर रहे हैं। जिसको लेकर वे छात्रों और युवाओं के बीच काफी लोकप्रिय है। गिरिडीह से जयराम महतो खुद उम्मीदवार हैं। वहीं गिरिडीह लोकसभा सीट से आजसू पार्टी के चंद्रप्रकाश चौधरी एनडीए उम्मीदवार है, जबकि इंडिया गठबंधन की ओर से विधायक मथुरा प्रसाद महतो को प्रत्याशी बनाया गया है। जयराम महतो पर वर्ष 2022 में विधानसभा घेराव का मामला दर्ज है, इसी मामले को लेकर रांची पुलिस ने उन्हें हिरासत में लिया, लेकिन अपने समर्थकों के बल पर वे फरार होने में सफल रहे।








