BOKARO : बोकारो के दुग्दा कोल वाशरी भारत ही नहीं एशिया महादेश का सबसे बड़ा कोल वाशरी थी। जो आखिरकार स्थानीय प्रबंधन व जन प्रतिनिधि की उदासीनता तथा ढुलमुल रवैया के कारण आखिरकार बंद हो गई। यूनियन के नेताओं का कहना है की इस वाशरी के बंद होने में प्रबंधन के साथ-साथ स्थानीय जनप्रतिनिधि जो खास करके केंद्र की राजनीति करते हैं, वह जिम्मेवार है। क्योंकि हम लोगों ने कई बार वाशरी की स्थिति से अवगत कराने का काम किया। लेकिन स्थानीय सांसद एक बार संसद में मामला उठाया भी उसके बाद उसकी सुध तक नहीं ली और अंततः वाशरी बंदी के कगार पर पहुंच गई।

जबकि इस कोल वाशरी प्लांट का इतिहास बहुत ही स्वर्णिम रहा है। प्लांट में पूर्व में 1800 सौ स्थायी मजदूर कार्यरत थे साथ ही साथ 2000 ठेका मजदूर भी काम करते थे। लेकिन वर्तमान समय में दुग्दा कोल वाशरी में अनिवार्य सेवा बिजली, पानी, सुख सुविधाओं के लिए 208 कर्मी कार्यरत है। दुग्दा कोल वाशरी कभी 24 घंटे में 700 मेट्रिक टन कोयला वास करता था। प्रबंधन के उद्योग विरोधी नीति के वजह से वर्ष 2021 से दुग्दा कोल वाशरी प्लांट में रो कोल का कोई भी रैक नहीं आया। धीरे-धीरे दुग्दा कोल वाशरी प्लांट बंदी के कगार पर पहुंच गया। कोल वाशरी के मजदूरों और श्रम संगठनों के प्रतिनिधियों ने वर्तमान सांसद चंद्र प्रकाश चौधरी के समक्ष दुग्दा कोल वाशरी की समस्याओं को कई बार रखा। लेकिन किसी ने भी दिलचस्पी नहीं दिखाई। जिसके कारण आज एशिया महादेश का सबसे बड़ा कोल वाशरी बंद के दहलीज पर खड़ा हो गया है।

इस वाशरी के बंद होने से हजारों लोगों के समक्ष प्रत्यक्ष तथा अप्रत्यक्ष रूप से रोजी-रोटी पर आफत आ गई है, क्योंकि दुग्दा क्षेत्र का एकमात्र जीव का उपार्जन का सबसे बड़ा माध्यम माना जाता रहा है। लोकसभा चुनाव में चंद्रपुरा दुग्दा दामोदा क्षेत्र के मतदाताओं का सबसे बड़ा ज्वलंत मुद्दा दुग्दा कोल वाशरी बना हुआ है ।







