स्कूली शिक्षकों ने स्कूल के इंचार्ज और अध्यक्ष पर लगाए कई तरह के घोटाले व स्कूल में लापरवाही बरतने का आरोप…
ASANSOL : आसनसोल के कुल्टी विधानसभा के सीतारामपुर का बहूचर्चित एन डी राष्ट्रीय विद्यालय अब धीरे धीरे अपनी पहचान खोता जा रहा है। आज के समय में लोग अपने बच्चों को अच्छी शिक्षा के लिए प्राइवेट स्कूल की और जा रहे है। लेकिन एक समय में इस स्कुल का नाम और सोहरत था। कारण स्कुल के पूर्व प्रधानाध्यापक आर एन पांडे ने जमीनी स्तर पर मेहनत कर शिक्षा के प्रति छात्र, छात्राओं के भीतर ललक जगाने के लिये कोई कमी नहीं छोड़ी थी। इसी व्यवस्था को देख लोग जागरूक हुए और देखते ही देखते करीब ढाई हजार छात्र, छात्राएं इस स्कूल में शिक्षा ग्रहण करने लगे। लेकिन आज प्रधानाध्यापक विहीन स्कूल नजराना, लूट खसोट, लापरवाही और आपसी मतभेद के कारण अपना अस्तित्व खोता जा रहा है।

स्कूल के अध्यक्ष और इंचार्ज पर लगा कई गंभीर आरोप
आप को बताते चले कि आसनसोल के इस सरकारी स्कूल की चर्चा पश्चिम बंगाल ही नहीं बल्कि अन्य राज्यों में भी होती थी। इलाके के लोग इस स्कूल को आदर्श स्कूल के नाम से एक अलग पहचान दिलाने की मांग कर रहे थे, ताकि अन्य स्कूल भी इससे सिख ले सके। लेकिन 2018 में जब से इस स्कुल के प्रधानाध्यापक आर एन पांडे रिटायरमेंट हुए। आज तक 6 वर्ष गुजर जाने के बाद भी स्कूल को अब तक प्रधानाध्यापक नहीं मिला। स्कूल में ढाई हजार छात्र, छात्राओं के बीच 35 शिक्षकों में शिक्षक गिरीश सिंह को जुलाई 2018 में स्कूल इंचार्ज बनाया गया, उसके बाद 2022 में स्कूल के शिक्षक पी के सिंह को इंचार्ज बनाया गया, जो अब भी स्कूल में अपनी सेवा दे रहे हैं। लेकिन आज तक इस स्कूल को प्रधानाध्यापक नसीब नहीं हो पाया है।

स्कूल में हो रही घोटाले को लेकर शिक्षकों ने शिक्षा विभाग और मुख्यमंत्री को लिखा पत्र
इसके लिए स्कूल के शिक्षकों ने राज्य शिक्षा विभाग के अलावा पश्चिम बंगाल की मुख्यमंत्री ममता बनर्जी को भी एक शिकायत पत्र भेजा है, जिस शिकायत पत्र में स्कूल के शिक्षकों ने स्कूल के इंचार्ज पी के सिंह और स्कूल की अध्यक्ष वार्ड नंबर 19 की तृणमूल पार्षद के ऊपर कई गंभीर आरोप लगाया है। दोनों मिलकर स्कूल में मनमाने तरीके से काम कर रहे हैं, स्कूल में शिक्षा ही नही, मिड डे मिल योजना, फाइनेंस विभाग, स्टाफ कमिटी, मैंनेजिंग कमिटी सहित कुल पांच कमिटी बनाई गई है। लेकिन सभी कमिटी का इंचार्ज खुद होकर मनमाने तरीके से इसका संचालन कर रहे है। इन दोनों पर आरोप यह भी है कि पीके सिंह और स्कूल की अध्यक्ष तृणमूल पार्षद उषा रजक आपसी सांठ गांठ से स्कूल में इन 6 वर्षों के बीच हर कमिटी में भारी घोटाला हो रहा है। जिसका इल्जाम स्कूल के इंचार्ज और तृणमूल पार्षद उषा रजक पर लगा है।

शिक्षकों ने स्कूल अध्यक्ष और स्कूल इंचार्ज पर पैसा वसूलने का भी लगाया आरोप
इसके अलावा भी इन दोनों पर और भी कई तरह के गंभीर आरोप लगे है। शिक्षक धनंजय यादव की अगर माने तो स्कूल के इंचार्ज पीके सिंह जब से स्कूल इंचार्ज बने हैं, तब से वह एक बार भी किसी क्लास में बच्चों की पढ़ाने नहीं गए हैं। जबकि उनको प्रतिदिन दो क्लास लेना है। एडमिशन के दौरान भी छात्रों से नि:शुल्क मिलने वाली फॉर्म के नाम पर 50 रुपए वसूले गए। यहां तक की किसी छात्र,छात्राओं से एडमिशन के नाम पर 500 तो किसी से 1000 और 1500 तक वसूले गए। जब इस मामले को लेकर पी के सिंह व स्कूल की अध्यक्ष तृणमूल पार्षद उषा रजक से पूछा गया तो उन्होंने इस मामले में कुछ भी बात करने से साफ इनकार कर दिया, यह कहकर की उनको जब जरुरत पड़ेगी वह मामले में अपना पक्ष देने के लिये बुला लेंगे।







